Heavy Rain Alert: उत्तर भारत में एक बार फिर मौसम का मिज़ाज तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ दिनों से जहां साफ आसमान और तेज धूप देखने को मिल रही थी, वहीं अब पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से कई राज्यों में बादल, बारिश और ओलावृष्टि की आशंका बढ़ गई है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि 20 से 28 फरवरी के बीच कई इलाकों में हल्की से मध्यम वर्षा के साथ तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओले गिर सकते हैं। इस बदलाव का असर आम जनजीवन के साथ-साथ खेती पर भी पड़ेगा।
पश्चिमी विक्षोभ क्या है और इसका असर क्यों पड़ता है
पश्चिमी विक्षोभ एक मौसमी प्रणाली है जो भूमध्यसागर क्षेत्र से नमी लेकर पश्चिमी दिशा से भारत की ओर बढ़ती है। जब यह सिस्टम उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय होता है तो वातावरण में नमी बढ़ती है और बादल बनने लगते हैं। इसके कारण बारिश, बौछारें, तेज हवा और कई बार ओलावृष्टि भी देखने को मिलती है। सर्दियों के अंतिम दौर और बसंत के शुरुआती समय में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अधिक दिखाई देता है।
इस बार भी ऐसा ही सिस्टम सक्रिय हो रहा है, जिसके कारण उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मौसम अस्थिर रहने का अनुमान है। तापमान में गिरावट और ठंडक बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है।
किन राज्यों में ज्यादा प्रभाव देखने को मिल सकता है
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम का असर अधिक देखने को मिल सकता है। इन क्षेत्रों में अलग-अलग दिनों में बूंदाबांदी, हल्की बारिश या कुछ स्थानों पर तेज बौछारें दर्ज की जा सकती हैं। खुले मैदान वाले इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना भी जताई गई है।
कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी चेतावनी दी गई है, जो विशेष रूप से किसानों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। शहरों में इसका असर ट्रैफिक और दैनिक गतिविधियों पर पड़ सकता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को नुकसान की आशंका रहेगी।
मौसम में अचानक बदलाव के संकेत
हाल के दिनों में लगातार धूप और सामान्य तापमान के कारण लोगों को लगा कि ठंड अब लगभग खत्म हो चुकी है। लेकिन पश्चिम से आने वाली नम हवाओं और बादलों के कारण अचानक मौसम ने करवट ले ली है। दोपहर बाद बादल छाने, हवा की दिशा बदलने और रात के तापमान में गिरावट जैसे संकेत इस बदलाव को मजबूत करते हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे समय में दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ जाता है, जिससे गलन और ठिठुरन का एहसास फिर से बढ़ सकता है।
किसानों के लिए विशेष सतर्कता जरूरी
यह समय रबी फसलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। गेहूं, चना, सरसों और अन्य फसलें इस समय वृद्धि के अहम चरण में होती हैं। ऐसे में बारिश और ओलावृष्टि फसलों पर सीधा असर डाल सकती है। इसलिए किसानों को मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
अगर आसमान में बादल छाए हों या वर्षा की संभावना हो, तो कीटनाशक, फफूंदनाशक या पोषक तत्वों का छिड़काव कुछ दिनों के लिए टाल देना बेहतर रहेगा। बारिश के दौरान किया गया स्प्रे अक्सर धुल जाता है और उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। इससे लागत भी बढ़ती है और परिणाम भी कमजोर रहते हैं।
सिंचाई और स्प्रे कार्य कब करें
जब तक मौसम स्थिर और साफ न हो जाए, तब तक खेतों में रासायनिक स्प्रे या वृद्धि नियंत्रक दवाओं का प्रयोग रोक देना चाहिए। अनुमान है कि महीने के अंतिम दिनों में मौसम फिर से साफ हो सकता है। उस समय सिंचाई, खाद और स्प्रे का काम दोबारा शुरू किया जा सकता है।
फसल विशेषज्ञों का कहना है कि स्प्रे हमेशा सूखे मौसम में और कम हवा की स्थिति में करना चाहिए ताकि दवा पत्तियों पर सही ढंग से टिक सके। बारिश से ठीक पहले या तेज हवा के समय किया गया छिड़काव प्रभावी नहीं रहता।
गेहूं, चना और सरसों की फसल में क्या सावधानी रखें
गेहूं की फसल इस समय बढ़वार के चरण में होती है। अधिक नमी और तेज हवा के कारण फसल गिरने (लॉजिंग) का खतरा बढ़ जाता है। जिन खेतों में फसल ज्यादा घनी है, वहां पानी का जमाव नहीं होने देना चाहिए। निकास की उचित व्यवस्था जरूरी है।
चना और सरसों की फसल में फूल और दाना बनने का समय चल रहा होता है। ओलावृष्टि या तेज बारिश से फूल झड़ सकते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। किसान चाहें तो मौसम साफ होने के बाद वृद्धि नियंत्रक (PGR) या पोषक स्प्रे का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन यह कार्य पूरी तरह साफ मौसम में ही करना चाहिए।
तापमान और ठंड का प्रभाव
बारिश और बादलों की वजह से दिन का तापमान घट सकता है और रातें अधिक ठंडी महसूस होंगी। पहाड़ी इलाकों से आने वाली ठंडी हवाएं मैदानों में ठंडक बढ़ा सकती हैं। इससे सुबह और देर रात के समय ठिठुरन बढ़ने की संभावना है।
स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह समय संवेदनशील होता है। बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं, इसलिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
अगले 48 घंटे क्यों अहम माने जा रहे हैं
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार आने वाले दो दिन सबसे ज्यादा प्रभाव वाले हो सकते हैं। इस दौरान बादल, हवा और वर्षा की गतिविधियां तेज रह सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है — सुबह साफ और दोपहर बाद बारिश जैसी स्थिति भी बन सकती है।
ऐसे में यात्रा, कृषि कार्य और खुले में होने वाली गतिविधियों की योजना बनाते समय मौसम अपडेट जरूर देखते रहें। किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों सभी को अलर्ट रहने की सलाह दी जा रही है।
निष्कर्ष
20 से 28 फरवरी के बीच उत्तर भारत के कई राज्यों में मौसम अस्थिर रहने का अनुमान है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण बादल, बारिश, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि संभव है। इसका असर जनजीवन और खेती दोनों पर पड़ सकता है। किसानों को विशेष सावधानी रखते हुए स्प्रे और सिंचाई जैसे कार्य मौसम साफ होने तक टालने चाहिए। सही समय पर लिया गया निर्णय फसल को नुकसान से बचा सकता है और उत्पादन बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।




